पीलिया के लक्षण | 12 symptoms of jaundice Hind

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इस तरह पहचाने पीलिया के लक्षण और जाने इलाज की जानकारी symptoms of jaundice

पीलिया एक बीमारी है जो शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा अधिक होने के कारण होती है। बिलीरुबिन का निर्माण शरीर के उत्तकों और खून में होता है। आमतौर पर जब किसी कारणों से लाल रक्त कोशिकाएं टूट जाती हैं तो पीले रंग के बिलीरुबिन का निर्माण होता है।

बिलीरुबिन लिवर से फिलटर होकर शरीर से बाहर निकलता है, लेकिन जब किसी कारणों से यह खून से लिवर में नहीं जाता है या लिवर द्वारा फिलटर नहीं होता है तो शरीर में इसकी मात्रा बढ़ जाती है जिससे पीलिया (Piliya in hindi) होता है।

यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें टोटल सीरम बिलीरुबिन का स्तर तीन मिलीग्राम प्रति डेसिमिटार से अधिक हो जाता है। पीलिया के मुख्य लक्षणों में आंख के सफेद हिस्सा का पीला होना है।

अधिकतर मामलों में पीलिया नवजात शिशुओं को होता है, लेकिन कुछ मामलों में यह वयस्कों को भी हो सकता है। इसके लक्षणों के आधार पर डॉक्टर पीलिया के प्रकार की पुष्टि कर इलाज की प्रक्रिया शुरू करते हैं।

पीलिया का इलाज नहीं कराने पर सेप्सिस हो सकता है और कुछ मामलों में लिवर फेल भी हो सकता है। इसलिए समय पर इसका इलाज कारना बहुत जरूरी है।

इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको पीलिया के लक्षण और बचाव के बारें में बताएंगे। साथ ही इसके कितने प्रकार होते हैं? और इसके इलाज की जानकारी विस्तार से देंगे। पढ़ना जारी रखें

पीलिया के लक्षण
symptoms of jaundice

1. पीलिया के तीन प्रकार होते हैं (There are three types of jaundice in Hindi)

प्री-हिपेटिक पीलिया / हेमोलिटिक पीलिया

पोस्ट-हिपेटिक पीलिया

हेपैटोसेलुलर पीलिया

ऊपर बताए इन लक्षणों को पहचानने के बाद डॉक्टर इनमें से पीलिया की पुष्टि करते हैं और उस आधार पर इलाज की प्रक्रिया शुरू करते हैं।

2. पीलिया रोग फैलने का कारण (cause of jaundice in Hindi) 

मरीजों के मल में पीलिया का वायरस मौजूद होता है। जिसके कारण यह बीमारी होने की सम्भावना सकती है। इसके अलावा यह बीमारी खानपान की चीजों दूध और दूषित पानी के कारण हो सकती है।

3. पीलिया की बीमारी से बचाव (prevention of jaundice in Hindi)

इस बीमारी से बचने के लिए साफ-सफाई का खास ध्यान रखना पड़ता है उसने आपको अपने आसपास साफ सफाई रखनी है साथ ही खाने पीने की चीजों को भी अच्छे से साफ करके खाना है ऐसा करने से पीलिया की बीमारी के अलावा अन्य संक्रमण से भी बचाव होता है।

4. पीलिया के क्या लक्षण है (what are the symptoms of jaundice in Hindi)

आपको बता दें कि वैसे तो पीलिया के मुख्य लक्षण त्वचा और आंखों का पीला होना है। लेकिन इसके अलावा भी इस बीमारी के निम्नलिखित लक्षण होते हैं। जिसे हम नीचे की ओर विस्तार से बता रहे हैं।

  • बुखार का होना 
  • थकान का होना 
  • वजन का घटना
  • शरीर कमजोरी होना 
  • भूख नहीं लगना 
  • पेट दर्द होना 
  • सिर दर्द होना 
  • शरीर में जलन का होना 
  • हल्के रंग का माल होना 
  • कब्ज की समस्या होना 
  • पेशाब रंग का होना 
  • कुछ मामले में खुजली और उल्टी का भी होना है

हमारे द्वारा ऊपर इन लक्षणों में से किसी खुद में महसूस करते हैं। आपको यह संदेह है कि आपको पीलिया है। तो बिना देर किए हुए आपको डॉक्टर से मिलकर इसका इलाज कराना चाहिए। क्योंकि डॉक्टर पीलिया के लक्षण के आधार पर जांच करके इसकी सटीक बता सकते है और उचित समय पर इसका इलाज भी प्रधान कर सकते हैं।

5. पीलिया होने का कारण (cause of jaundice in Hindi) 

बिलीरुबिन का कार्य शरीर से गंदगी निकालना होता है लेकिन कुछ कारणों से इसकी मात्रा 2.5 से अधिक हो जाती है। जिसके परिणाम स्वरुप यह काम करना बंद कर देता है। यह कारण ही पीलिया की समस्या पैदा कर देता है।

6. बिलीरुबिन बढ़ने का कारण (cause of increased bilirubin in Hindi)

बिलीरुबिन का निर्माण लाल रक्त की कोशिकाएं जल्दी टूटने के कारण होती है जिस कारण प्री-हेपिटाइटिस पीलिया होने का खतरा होता है। इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं इसमें मुख्य रूप से यह भी है।

  • मलेरिया
  • थैलासीमिया
  • गिल्बर्ट सिंड्रोम 
  • सिकल सेल रोग

इसके अन्य आनुवंशिक कारण भी जोते है 

जब लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है या लिवर में किसी तरह का संक्रमण फैल जाता है। तो हेपैटोसेलुलर पीलिया हो सकता है। यह अधिकतर तैलीय, मसालेदार और शराब का सेवन करने से कब्ज के कारण होती है।

पित्त की नलिका में रूकावट होने के कारण पोस्ट-हेपेटिक पीलिया होता है। पित्त की नलिका में रूकावट होने के कारण लीवर में घाव पित्त की पथरी हेपेटाइटिस या किसी दवा का साइड इफेक्ट हो सकता है।

7. पीलिया रोग किस किस को हो सकता है (Who can get jaundice in Hindi)

8.5 महीने से जन्मे शिशु को पीलिया रोग होने का खतरे की संभावना अधिक होता है। इसका मुख्य कारण उनका लिवर पूर्ण रूप से विकसित ना होना है। इसके अलावा ऐसे शिशु जिन्हें पूर्ण रूप से मां का दूध प्राप्त नहीं होता, उन्हें भी पीलिया का खतरा होता है।

इसके अलावा शिशुओं में अन्य कारणों से भी पीलिया रोग हो सकता है जो इस प्रकार है

  • सेप्सिस संक्रमण के कारण
  • आंतरिक रक्तस्राव के कारण
  • शिशु में लिवर की समस्या के कारण
  • जन्म के दौरान शिशु को चोट लगना के कारण
  • शिशु की लाल रक्त कोशिकाओं में समस्या होने के कारण
  • खून के प्रकार का अलग होना जैसे आरएच रोग
  • आनुवंशिक समस्या के कारण
  • जैसे कि जी6पीडी की कमी के कारण

8. पीलिया रोग की जटिलताएं क्या है (What are the complications of jaundice in Hindi)

पीलिया रोग की जटिलता कारण इसकी और गंभीरता पर पूरी तरह निर्भर करते हैं। आइए नीचे की ओर देखते हैं इसकी जटिलताओं में क्या कहता मिल है।

  • ब्लीडिंग
  • इंफेक्शन
  • एनीमिया
  • हेपेटिक एंसेफैलोपैथी
  • क्रोनिक हेपेटाइटिस
  • कुछ मामलों में लिवर फेल होना

9. पीलिया रोग की जांच कैसे की जाती है (How is jaundice diagnosed in Hinfi?)

कई प्रकार से पीलिया की जांच की जाती है इसकी पुष्टि करने के लिए डॉक्टर आमतौर पर निम्न जांच करने का सुझाव देते हैं।

  • बिलीरुबिन टेस्ट
  • हेपेटाइटिस ए, बी और सी की जांच
  • कम्प्लीट ब्लड काउंट टेस्ट
  • अल्ट्रासाउंड
  • एमआरआई स्कैन
  • लिवर बायोप्सी
  • सिटी स्कैन
  • एंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड कोलैंजियोंपैंक्रिटोग्राफी

इसके अलावा डॉक्टर कौन सा जांच करते हैं, यह मरीज के लक्षण, पीलिया के प्रकार पर और उम्र निर्भर करता है।

10. पीलिया रोग का इलाज (treatment of jaundice in Hindi)

पूरी तरह से पीलिया रोग का इलाज के कारण पर निर्भर करता है इस बीमारी को ठीक करने के लिए डॉक्टर अनेकों उपचार विकल्पों का चयन कर सकते हैं। जिसमें दवाओं द्वारा सर्जरी द्वारा जीवन शैली और डाइट में बदलाव आदि शामिल होते हैं।

11. पीलिया होने की स्थिति में क्या खाना चाहिए (what to eat in case of jaundice in Hindi)

यदि आपको पीलिया है, तो आपको खानपान में खास ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं पीलिया रोग के दौरान कैसा होना चाहिए खान पान।

  • फलों का जूस पीना चाहिए
  • ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए
  • ताजा और शुद्ध भोजन करना चाहिए
  • थोड़ा-थोड़ा खान दिन में 4-6 बार खाना चाहिए
  • दही खाएं
  • मूली खाएं
  • प्याज खाएं
  • पपीता खाएं
  • तुलसी खाएं
  • टमाटर खाएं
  • छाछ मट्ठा खाएं
  • नारियल पानी खाएं
  • धनिया का बीज खाएं
  • गिलोय और शहद खाएं

खाना खाने से पहले अच्छी तरह हाथों को धोएं। क्योंकि पीलिया रोग में साफ-सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए।

12. पीलिया रोग होने पर क्या परहेज करना चाहिए (What should be avoided in case of jaundice in Hindi)

पीलिया रोग होने की स्थिति में आपको कुछ चीजों से परहेज करना चाहिए। क्योंकि यह इस रोग को और भी गंभीर कर सकता है। जिससे समस्या और भी बढ़ सकती है।

  • बाहर का खाने से परहेज करें
  • दाल और बिन्स खाने से परहेज करें
  • मक्खन से खाने से परहेज करें
  • ज्यादा मेहनत करने से बचें
  • एक साथ ढेर (अधिक मात्रा में) खाने से परहेज करें
  • कॉफी और चाय से परहेज करना चाहिए
  • ज्यादा तीखा या तैलीय चीजें खाने से परहेज करें
  • अंडा, मीट, चिकन और मछली खाने से परहेज करें

13. पीलिया रोग से बचाव (prevention of jaundice in Hindi)

यदि आप कुछ सावधानियां बरते हैं तो पीलिया रोग से बचा जा सकता है डॉक्टरों के अनुसार पीलिया से बचाव के लिए लीवर का स्वस्थ रहना बहुत ही जरूरी है क्योंकि लीवर पाचन के रस का  उत्पादन करता है। जिससे भोजन को हजम करने में मदद मिलती है।

इसके अलावा लीवर खून में थक्का बनने से रोकता है साथी सभी से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है यदि आप इन बातों का पालन करते हैं, तो आपका लीवर स्वस्थ रहेगा और आप पीलिया रोग से बचे रहेंगे होगा।

  • एक संतुलित डाइट लिवर को स्वस्थ बनाने में अहम भूमिका निभाती है इसलिए अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियों और फलों को शामिल जरूर करें
  • एक्सरसाइज (Exercise) रोजाना सुबह काम आप हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करके अपने लिवर को स्वस्थ रख सकते हैं। इसलिए सुबह या शाम को एक्सरसाइज जरूर करें।
  • आप अपने दैनिक जीवन शैली में साफ सफाई का ध्यान जरूर रखें साफ पानी पीने के साथ-साथ साफ सब्जियों और फलों का सेवन करें।
  • शराब का सेवन बिल्कुल भी ना करें क्योंकि इसके सेवन से लीवर पर बुरा असर पड़ता है। यदि आप शराब का सेवन कर रहे हैं तो आपको पीलिया होने का खतरा भी अधिक होता है। इसीलिए पीलिया से बचने के लिए आपको शराब का सेवन बंद करना चाहिए

यदि आप ऊपर बताई गई बातों का पालन करते हैं। तो आप पीलिया से बचाव कर सकते हैं।

14. पीलिया होने पर डॉक्टर से कब मिलना चाहिए (When should you see a doctor if you have jaundice in Hindi?)

यदि आप नीचे बताए गए कुछ इन लक्षणों को अपने अंदर में अनुभव करते हैं तो आपको जल्द से जल्द डॉ से मिलना चाहिए जिसे आप का उचित और समय पर इलाज हो सके।

  • आंखों में पीलापन हो जाना 
  • त्वचा का पीला पड़ जाना 
  • जल्दी थकान महसूस होना 
  • पेट दर्द  होना
  • वजन घर जाना 
  • भूख ना लगना 
  • बुखार आना आदि।

आइए नीचे की ओर बढ़ते हैं और अक्सर लोगों द्वारा गूगल में पूछे जाने वाले सवालों के जवाब देते हैं।

पीलिया कितने पॉइंट होना चाहिए?

पीलिया में 1.0 प्रतिशत या इससे कम पॉइंट होना चाहिए यदि इस का प्रतिशत 2.5 से ऊपर होता है तो पीलिया रोग खतरा होता है।

काला पीलिया के लक्षण?

जॉन्डिस एक बीमारी है, जो बिलुरुबिन की मात्रा अधिक होने पर होती है। बिलुरुबिन का निर्माण हमारे शरीर के उत्तकों और खून में होता है। यदि किसी कारण से लाल रक्त कोशिकाएं टूटने लगती हैं। तो पीले रंग के बिलीरुबिन का निर्माण होता है। जो इस बीमारी के होने का कारण है।

क्या पीलिया संक्रामक रोग है?

पीलिया रोग का संक्रमण दूषित पानी या सब्जियों फलों के सेवन से हो सकता है। लेकिन यह पूरी तरह से सच नहीं है, यह बीमारी हिने के और भी कई कारण हो सकते हैं।

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